महाराष्ट्र के किंगमेकर नहीं किंग बने उद्धव ठाकरे


मातोश्री उस इमारत का नाम है, जिसे मुंबई और महाराष्ट्र समेत पूरे देश में पहचान की जरूरत नहीं है। बाल ठाकरे ने यहां से कई बार महाराष्ट्र में किंगमेकर की भूमिका निभाई। 28 नवंबर 2019 को एक नया इतिहास लिखा गया, जब इसी इमारत से निकलकर ठाकरे परिवार का एक सदस्य मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा है। जी हां, बाल ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री हैं।





हिंदुत्व का पैरोकार माना जाने वाला ठाकरे परिवार हमेशा से मराठी अस्मिता को सबसे आगे रखता आया था। यही वजह थी कि भारतीय जनता पार्टी के साथ शिवसेना की सबसे लंबी राजनीतिक साझेदारी भी थी। लेकिन सत्ता कुरूप भी होती है और यह पूरे देश ने देखा। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर हुई उठापटक ने निश्चित रूप से उन लोगों की धारणा को और मजबूत किया होगा, जो राजनीति को गंदगी मानते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव शिवसेना और भाजपा ने मिलकर लड़ा था। परिणाम भी पक्ष में थे, लेकिन कुर्सी की खींचतान ने सारे समीकरण ही पलट दिए।

शिवसेना ने कहा कि उसे मुख्यमंत्री पद चाहिए। लेकिन भाजपा ने इनकार किया। फिर ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला सुझाया, लेकिन उस पर भी बात नहीं बनी। अंतत: अदावत की खाई गहराने लगी और लगभग तीन दशक पुराना गठबंधन चरमराकर टूट गया।

2019 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव इतिहास में दर्ज हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें वो सब हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। भाजपा-शिवसेना टूट गया। एक—दूसरे को फूटी आंख पसंद न करने वाली पार्टियां एक साथ आ गईं और एक मिली जुली सरकार बनाई गई है, जिसके मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बने हैं।

इन चुनावों में पहली बार ठाकरे परिवार का एक सदस्य चुनावी मैदान में उतरा और जीता भी। इन्हीं चुनावों के बाद कभी किंगमेकर रहा ठाकरे परिवार अब खुद किंग बना है। कई परंपराएं टूटीं और नई गढ़ी गईं।