महिलाओं के साथ यौन प्रताड़ना के मामले महानगरों के बजाए छोटे शहरों में कहीं अधिक


 महिलाओं को सबसे ज्यादा सार्वजनिक परिवहन वाले वाहनों जैसे बस और ऑटो में परेशान किया जाता है। इस मामले में राजस्थान का जोधपुर शहर अव्वल है।

यह बात एक सर्वे में सामने आई है। मध्य भारत के छोटे शहरों में सुरक्षा मानकों को जांचने के लिए भोपाल, ग्वालियर और जोधपुर में 9133 महिलाओं को लेकर यह सर्वे किया गया था। एशिया फाउंडेशन, सेफ्टीपिन और सेंटर सोशल रिसर्च द्वारा 'वुमन एंड मॉबिलिटी' पर यह सर्वे कराया गया था। 


 देखने पर पता चलता है कि राजस्थान के जोधपुर में सबसे ज्यादा यौन प्रताड़ना के 67 फीसदी मामले रोडवेज बस, ई-रिक्शा, ऑटो और ओला-उबर में हो रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में हर दो में से एक युवती को गंदी नजरों और हरकतों का शिकार होना पड़ता है। वहीं मध्यप्रदेश के ही ग्वालियर शहर में इस तरह के 35 फीसदी मामले सामने आए हैं। 


इस अध्ययन का मकसद बड़े शहरों के बजाए छोटे शहरों की घटनाओं को सामने लाना था। कारण कि दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में जब ऐसी कोई घटना होती है तो उसकी राष्ट्रीय पटल पर चर्चा होने लगती है। पूरा देश उस पर बहस करने लगता है। जबकि छोटे शहरों की ऐसी घटनाएं कम ही चर्चा का विषय बन पाती हैं। 


अध्ययन में शामिल 57.1 फीसदी छात्राओं ने और 50 फीसदी अविवाहित युवतियों ने अश्लील हरकतों का शिकार होने की बात कही है। इनमें से 65 फीसदी युवतियों ने कहा कि उन्हें रोज ऐसी स्थिति का शिकार होना पड़ता है। ऐसे में किस-किस की रिपोर्ट लिखाएं। ज्यादातर का कहना था कि ऐसे मामलों में पुलिस भी कुछ नहीं करती।


सार्वजनिक परिवहन या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं को तंग करने के मामलों का कई श्रेणियों में अध्ययन किया गया। इनमें घूरना, कपड़ों के भीतर झांकना, भद्दी बातें बोलना, गंदे इशारे करना, सटकर खड़े होना और नोंचना जैसी हरकतें शामिल की गईं। सर्वे के दौरान ट्रांसपोर्टरों की भी राय ली गई, उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं के लिए खुद युवतियां जिम्मेदार हैं।