शिवसेना विधायकों का ठिकाना बदला लेमन ट्री भेजे गए बहुमत परीक्षण से पहले सरगर्मी तेज,


 


 


महाराष्ट्र में बहुमत परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार सुबह सुनाएगा आदेश


शिवसेना के विधायकों ने ललित होटल छोड़ा, लेमन ट्री होटल नया ठिकाना


एनसीपी ने हयात रीजेंसी और कांग्रेस ने जेडब्ल्यू मैरियट में किया है इंतजाम


12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद होटलों में टिके हैं विधायक



 

 


 

मुंबई
महाराष्ट्र में बहुमत परीक्षण का दिन अभी तय नहीं हुआ है लेकिन उससे पहले अपने-अपने पाले के विधायकों को बचाए रखने की कवायद तेज हो गई है। नए हफ्ते की शुरुआत के साथ ही मुंबई में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। जहां एक ओर शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ 162 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा, वहीं दूसरी ओर अब शिवसेना ने अपने विधायकों का पुराना ठिकाना बदल दिया है। एनसीपी और कांग्रेस के नेता भी होटलों में अपने विधायकों की किलेबंदी कर रहे हैं।

 



 

इन होटलों में टिके हैं विधायक
शिवसेना के 55 विधायक (आदित्य ठाकरे को छोड़कर) अभी तक द ललित होटल में ठहरे हुए थे। सोमवार दोपहर विधायकों को एक दूसरे होटल लेमन ट्री प्रीमियर में भेज दिया गया है। इसके साथ ही एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के विधायक जिन होटलों में ठहरे हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रविवार देर शाम शिवसेना ने नए-नवेले 303 कमरों वाले लेमन ट्री प्रीमियर में अपने विधायकों के रुकने के लिए कमरे बुक कराए। वहीं, एनसीपी ने 401 कमरों वाले हयात रीजेंसी में अपने विधायकों के ठहरने का इंतजाम किया है। कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों के लिए जेडब्ल्यू मैरियट होटल में टिकने की व्यवस्था की है। इससे पहले शिवसेना के विधायक द ललित और एनसीपी के विधायक द रेनेसां होटल में रुके हुए थे।

हयात रीजेंसी होटल में मौजूद एनसीपी विधायक



12 नवंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ और इसके बाद किसी संभावित खरीद-फरोख्त की कोशिश को नाकाम करने के लिए पार्टियों ने अपने विधायकों को होटलों में ले जाना शुरू कर दिया। इस बीच मुंबई में होटल बिजनस में उछाल देखा जा रहा है। द फर्न चेन का संचालन करने वाले कॉन्सेप्ट हॉस्पिटैलिटी के एमडी परम कन्नापिल्लई का कहना है, 'मुंबई के कुछ होटलों में अप्रत्याशित कारोबार हुआ है, जो बहुत अच्छा है।'


शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन ने अपने अधिकांश विधायकों को बाहर रखने की बजाय शहर के होटलों में ठहराया है, जिससे बहुमत परीक्षण के दौरान जल्द विधानसभा पहुंचाया जा सके। विधायकों को मुख्य रूप से उपनगरों में स्थित होटलों में रखा गया है, जिनमें दक्षिण मुंबई के होटलों की तुलना में ज्यादा कमरे हैं।