विरोधियों का हिंसा से दमन और फिर कदम वापस खींचना कायरता की निशानी: प्रियंका

 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नागरिकता कानून और एनआरसी के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला। पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि संविधान के खिलाफ कानून लाना, झूठ बोलना, विरोधी आवाज को हिंसा से कुचलना और फिर कदम वापस खींचना कायरता की निशानी है। 
 

उन्होंने मोदी सरकार को कायर सरकार की संज्ञा देते हुए कहा कि कांग्रेसी कार्यकर्ता न डरते हैं और न ही अपना विरोध प्रकट करने के लिए हिंसा का रास्ता चुनते हैं। संघ परिवार पर निशाना बोलते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी की लड़़ाई में कोई योगदान नहीं दिया, वे आज हमें राष्ट्र भक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित स्थापना दिवस समारोह में प्रियंका ने कहा कि आज देश संकट में है। संविधान के खिलाफ एनआरसी और सीएए कानून लाया गया। विद्यार्थी, नौजवान और आम लोग उसका विरोध कर रहे हैं, तो हिंसा से उनकी आवाज को कुचला जा रहा है। सरकार दमन और भय का रास्ता अपना रही है। लेकिन, इतिहास गवाह है कि जब-जब दमन की ताकत से आवाजों को दबाने की कोशिश हुई, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत से उसके खिलाफ संघर्ष किया। भय के माहौल में वे कभी चुप नहीं बैठे।

प्रियंका ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि संविधान विरोधी इन कृत्यों के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तो हम कायर साबित होंगे। उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, देखिए जो डरता है, वह दो काम करता है। एक, विरोधी विचार वालों यानी दुश्मन के खिलाफ हिंसा करता है। 

उसके बाद कदम पीछे खींचता है। सरकार अपने संविधान विरोधी कृत्य से कदम पीछे खींचते हुए कह रही है कि हमने तो कभी एनआरसी की बात ही नहीं की थी। सिर्फ एनपीआर की बात की थी। जबकि, एनआरसी पर पूरे देश में इन्होंने ही चर्चा करवाई। आज देश इनकी कायरता और झूठ को पहचान चुका है। अब नौजवानों को सिर्फ और सिर्फ सच चाहिए।

प्रियंका ने कहा कि यह देश हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन सभी का है। हर जाति व धर्म का खून इस देश की मिट्टी में मिला है, जिसे कोई अलग नहीं कर सकता। प्रियंका ने कहा कि हमें सबसे ज्यादा इस बात पर गर्व है कि मानव इतिहास में पहली बार कांग्रेस ने अहिंसा व सत्य के बल पर भारत में ब्रिटिश साम्राज्य खत्म किया। इससे पहले जो भी साम्राज्य ढाए गए, उनमें बड़े पैमाने पर हिंसा का प्रयोग हुआ।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि हमारी लड़ाई सत्य, अंहिसा और करुणा पर आधारित है। कांग्रेस कार्यकर्ता के दिल में भय और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होता। दुर्भाग्य से देश में आज वही शक्तियां राज कर रही हैं, जिनकी विचारधारा से हमारी एतिहासिक टक्कर रही है। यह दमनकारी विचारधारा है। जिन्होंने आजादी की लड़ाई में रत्ती भर योगदान नहीं दिया, वे आज लोगों को राष्ट्रभक्ति का तमगा बांटते फिर रहे हैं। 

देश में फूट डालने का काम कर रहे हैं। देश में दमनकारी सीएए और एनआरसी कानून लाया जा रहा है। इनके खिलाफ आवाज उठाने पर बिजनौर में 21 साल का ऐसा युवा पुलिस ने मार दिया, जो दूध लेने घर से निकला था। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भी वह शामिल नहीं था।

पुलिस ने घर वालों को 40 किलोमीटर दूर शव दफनाने के लिए बाध्य किया। एफआईआर न लिखाने के लिए घर वालों धमकाया। इस तरह केतमाम बच्चों को मारा गया। जिन्हें जान से नहीं मार पाए, उन्हें पीटकर जेल में डाल दिया। यह सरकार की कौन सी नीति का हिस्सा है, समझ नहीं आ रहा है।



किसानों, बेरोजगारों, महिलाओं की नहीं सुन रही सरकार



प्रियंका ने कहा कि आवारा पशुओं से किसान परेशान है। उन्हें फसल का वाजिब दाम भी नहीं मिल रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति यह है कि उन्नाव में इंसाफ मांग रही रेप पीड़िता के परिवार पर अत्याचार किया जाता है। फिर पीड़िता को जिंदा जलाकर मार दिया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर सरकारी की नहीं तो किसकी है। सरकार ने नौकरियां छीनीं। शिक्षामित्रों को निकाला। पुलिस मित्र में सिर्फ आरएसएस के लोग भरे।

बुजुर्ग नेताओं के अनुभवों से सीख लेने की नसीहत
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह बात सही है कि आज हम यूपी और केंद्र में शासन-प्रशासन में नहीं हैं। लेकिन, अगर केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं तो अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर रहे हैं। कहीं किसी महिला के साथ अत्याचार हो रहा है तो पीड़ित परिवार की आवाज तो बन सकते हैं। किसानों व विद्यार्थियों के साथ सड़क पर तो उतर सकते हैं।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा, मेरा और नई प्रदेश कार्यकारिणी का पूरा समर्थन करें। याद रखें कि जहां नौजवान की ऊर्जा महत्वपूर्ण है, वहीं बुजुर्गों का अनुभव भी काफी काम आता है। इसलिए उनके अनुभव से जरूर सीखें। नेहरू, गांधी और सरदार पटेल की विचारधारा पर चलते हुए जनता को एकजुट करें। जब तक जनता के दुख-दर्द नहीं बाटेंगे, तब तक न तो आप आगे बढ़ेंगे और न ही पार्टी आगे बढ़ेगी।





यह है पूरा मामला



नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने पर पिछले दिनों गिरफ्तार किए गए रिटायर्ड आईपीएस एसआर दारापुरी के परिजनों से मिलने जाने के लिए शनिवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पहले तो पुलिस ने उनकी गाड़ी को जबरन लोहिया पार्क के सामने रोक लिया। कहा कि बिना पूर्वसूचना के सुरक्षा कारणों से रोका जा रहा है। इस पर प्रियंका ने आपत्ति जताई। साथ ही आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका गला दबाकर रोका और धक्का दिया, जिसके कारण वह गिर गईं।

कुछ दूर पैदल फिर स्कूटी से तय किया रास्ता
इसके बाद प्रियंका ने कुछ दूर पैदल फिर स्कूटी से पुल पार किया। प्रियंका स्थापना दिवस समारोह में शाामिल होने के कुछ देर बाद विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए एसआर दारापुरी और पार्टी की पूर्व प्रवक्ता सदफ जफर के परिजनों से मिलने जा रही थीं। छह बजकर 10 मिनट पर वे इंदिरानगर स्थित एसआर दारापुरी के आवास पर पहुंचीं। यहां उन्होंने दारापुरी की बीमार पत्नी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। 

प्रियंका ने मीडिया से कहा कि ये सब जो हो रहा है ये मेरी समझ से बाहर है। मैं गाड़ी में शान्तिपूर्वक दारापुरी जी के परिवार से मिलने जा रही थी। रास्ते में अचानक पुलिस की गाड़ी आई और मुझे रोक लिया गया।  मैंने पूछा कि मुझे रोकने का क्या मतलब है।

पुलिस ने मुझसे कहा कि आपको आगे नहीं जाने देंगे। इस बीच पुलिस ने मेरा गला दबाया, मुझे धकेला गया। एक महिला पुलिस कर्मचारी ने मुझे धकेला। मैं चलती रही। मैं टू व्हीलर पर बैठी तो फिर रोका, दोबारा पुलिस ने मुझे रोका तो मैं पैदल चलकर गई।


मानवाधिकार आयोग से की शिकायत



कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ हुई कथित बदसलूकी की शिकायत मानवाधिकार आयोग में की गई है। इस शिकायत में प्रियंका गांधी की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया गया है।

यूपी में लागू हो राष्ट्रपति शासन: कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने लखनऊ में प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रोके जाने के मामले में जांच की मांग की है। कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुष्मिता देव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कहा, 'ये तानाशाही है कि प्रियंका गांधी एक विरोधी दल के नेता होने के नाते डंडे के बल पर जेल में भर्ती किए गए लोगों के परिजनों से मिलने जा रही थीं, लेकिन उन्हें रोका गया।

इसकी जांच होनी चाहिए। यूपी पुलिस की सर्किल ऑफिसर ने प्रियंका गांधी की गाड़ी को इस तरीके से रोका कि उनका एक्सिडेंट होते-होते बचा। उनकी गाड़ी में पांच से कम लोग मौजूद थे और इस तरह वो धारा 144 का उल्लंघन भी नहीं कर रही थीं। लेकिन उन्हें रोका गया।'