आग से 63000 वर्ग किमी इलाका खाक, लेकिन राख और जले पेड़ पर नया जीवन शुरू ऑस्ट्रेलिया में


ऑस्ट्रेलिया के झाड़ीनुमा जंगलों में पिछले साल सितंबर से आग लगी है। करीब 63000 वर्ग किमी जमीन का पूरा पारिस्थितिक तंत्र जलकर तबाह हो गया है। इस बीच जले हुए पेड़ के ठूंठों, तनों और जड़ों से नई कोपलें फूटने लगी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह जंगल में जीवन लौटने का संकेत है। इनकी तस्वीरें एक स्थानीय फोटोग्राफर मरे लोबे ने ली हैं। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। 


मरे लोबे न्यू साउथ वेल्स के सेंट्रल कॉस्ट स्थित कुलनुरा में अपने घर की हालत देखने गए थे, यहां दिसंबर महीने में आग फैली थी। उन्होंने देखा, "कुदरत ने अपना मेक ओवर का काम शुरू कर दिया है। जले हुए पौधों के तनों और जड़ों से नई हरी पत्तियां वाले पौधें और कोपलें निकल रही हैं। उनका रंग गुलाबी जैसा है। जमीन में कई छोटे पौधे उगने लगे हैं।" ऑस्ट्रेलिया में आग से अब तक 28 लोगों की जान चली गई है। दो हजार से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए हैं।


व्हीकल इंस्पेक्टर के काम से रिटायर होने के बाद 71 साल के फोटोग्राफर मरे लोबे ने इन फोटो को सोशल मीडिया पर सोमवार को पोस्ट कीं, जिन्हें शेयर किया गया। वे बदलाव पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं। उधर, यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के इकोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ किम्बर्ले सिम्पसन के मुताबिक, "इन पौधों की प्रजातियों ने लाखों साल से लगातार आग का सामना किया है। इस आग ने उन्हें जलकर फिर तैयार होने के लिए विकासवादी बनाया है। पौधों का नया अंकुरण जीवन की सतत प्रक्रिया है। यह पौधों के जलने के बाद उगने बढ़ने और नए वातावरण में खुद को ढलने की क्षमता का भी प्रतीक है।" 


लोगों ने फोटोग्राफर की तारीफ की, प्रकृति को शुक्रिया कहा
मरे लोबे के फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक यूजर ने लिखा-"प्रकृति अपना काम करना जानती है। इससे नई उम्मीद बनी है। जल्द सबकुछ अच्छा हो जाएगा।"