अगले 5 साल में 71 हजार करोड़ रुपए के मेक इन इंडिया प्रोडक्ट्स दुनिया में एक्सपोर्ट करेंगे-जेफ बेजोस


करीब 8.30 लाख करोड़ रुपए की नेटवर्थ वाले दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेजोस भारत दौरे पर हैं। अमेजन के फाउंडर और सीईओ बेजोस ने बुधवार को दिल्ली में छोटे-मध्यम कारोबारियों के लिए आयोजित कार्यक्रम 'अमेजन संभव' में भारत को लेकर दो घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा- 'अमेजन 2025 तक 10 अरब डॉलर (71 हजार करोड़ रुपए) मूल्य के मेक इन इंडिया प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करेगा। इसके साथ ही भारत में छोटे और मध्यम कारोबारों को डिजिटाइज करने के लिए एक अरब डॉलर (7,100 करोड़ रुपए) का निवेश किया जाएगा।' बेजोस ने इस घोषणा की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि अमेजन भी किसी समय छोटा बिजनेस था।


बेजोस के संबोधन के मुख्य अंश


यह सदी भारत की होगी
'भारत का जोश, ऊर्जा और यहां के लोग विशेष हैं, यहां लोकतंत्र है। यह सदी भारत की होगी। 21वीं सदी में भारत-अमेरिका का गठबंधन सबसे अहम होगा। बेजोस ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कहा- जो भी इसके दुष्प्रभावों को नहीं समझ रहा वह गलती कर रहा है। पिछले 10-20 सालों में जलवायु परिवर्तन के असर की हकीकत को समझने में लोगों ने गंभीरता नहीं दिखाई। इस मुद्दे पर दुनियाभर के लोगों को साथ आने की जरूरत है। अमेजन 2030 तक 100% स्थायी बिजली (सस्टेनेबल इलेक्ट्रिसिटी) का इस्तेमाल करने लगेगी। हाल ही में हमने 1 लाख इलेक्ट्रिक डिलीवरी वाहन खरीदने का फैसला किया। जून तक हम प्लास्टिक का इस्तेमाल भी बंद कर देंगे।'


एक कामयाबी से कई विफलताओं की भरपाई संभव
'विफलताओं के लिए अमेजन दुनिया की सबसे अच्छी जगह है, क्योंकि हम बहुत ज्यादा अभ्यास करते हैं। विफलताएं दो तरह की होती हैं। पहली और सबसे अहम वह जिससे हम कुछ सीखने और प्रयोग करने के लायक बनते हैं। दूसरे तरह की विफलता काम और उत्कृष्टता संबंधी होती है, इससे हमें जरूर बचना चाहिए। सीख इससे भी लेनी चाहिए, लेकिन स्वीकार करना चाहिए कि ऐसी विफलता खराब होती है। एक कामयाबी और एक विजेता दर्जनों नाकामियों की भरपाई कर सकता है।'


ऐसे लोग भी भर्ती करें जिनसे आप सीख सकें
'भर्तियां होती रहनी चाहिए। सिर्फ ऐसे लोगों की नहीं जिन्हें आप सिखा सकें बल्कि ऐसे लोग भी रखने चाहिए जो आपको सिखा सकें। अमेजन की कामयाबी का यही राज है। पिछले 25 साल में जो हुआ वह मेरी उम्मीदों से ज्यादा है। मुझे वे दिन याद हैं जब मैं खुद पैकेज डिलीवर करता था, हम किताबें बेचते थे। उस दौर में हमने कंपनी बनाने के बारे में सोचा था, लेकिन इनता नहीं जिनता आज आप देख रहे हैं। यह सब कुछ एक कदम बढ़ाने का नतीजा है।'


अमेजन विफल रहती तो सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर होता
'1994 में न्यूयॉर्क में एक कंपनी में काम करता था। मुझे अहसास हुआ कि इंटरनेट तेजी से बढ़ रहा है। इससे मुझे ऑनलाइन किताबें बेचने का विचार आया। मैंने अपने बॉस को यह बात बताई। वे मुझे पार्क में ले गए और विस्तार से सुना। उन्होंने कहा- यह विचार उनके लिए बहुत बड़ा है, लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिसके पास अच्छी जॉब नहीं है। बेजोस ने बताया- उस वक्त मन में कई शंकाएं थीं। मैं पछतावा नहीं चाहता था, इसलिए सोच रहा था- क्या बोनस की परवाह किए बिना साल के बीच में नौकरी छोड़ना ठीक होगा? लेकिन, मैंने यही समझा कि मेरे पास बड़ा आइडिया है, कोशिश नहीं करूंगा तो हमेशा पछतावा रहता। कोशिश करने के बाद नाकाम भी रहूंगा तो अफसोस नहीं होगा।' अमेजन इंडिया के चीफ अमित अग्रवाल ने बेजोस से पूछा कि उनकी योजना कामयाब नहीं होती तो क्या करते? इस पर बेजोस ने कहा- मैं कहीं सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनकर बहुत खुश रहता।


बेजोस ने पतंग उड़ाई, कहा- बचपन याद आया
बेजोस ने अमेजन समिट से पहले दिल्ली में बच्चों के साथ पतंग भी उड़ाई। एक बच्ची ने उनसे पूछा- क्या आपने पहले कभी पतंग उड़ाई है। बेजोस ने कहा- जब बच्चा था, तब पतंगें उड़ाता था। लंबे समय बाद बचपन की यादें ताजा हो गईं। दूसरे बच्चे ने पूछा- क्या आप इसे मिस करते थे, बेजोस ने कहा- हां। उन्होंने बच्चों को अपना इंस्ट्रक्टर बताते हुए कहा कि आपने बहुत अच्छा सिखाया, आपका शुक्रिया।