चीन और पाकिस्तान बॉर्डर से सटे एयरबेस पर 1200 करोड़ के आधुनिकीकरण कार्यों पर ब्रेक


चीन व पाकिस्तान की सामरिक तैयारियों से मुकाबला करने के पश्चिम व पूर्वी सीमा पर स्थित बड़े एयरबेस में आधुनिकीकरण के कामों पर पिछले चार माह से ब्रेक लग गया। चीन व पाकिस्तान बॉर्डर पर सटे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एयरबेस पर गत सितंबर से ही करीब 1200 करोड़ के बिल अटके हुए हैं। जबकि इन प्रोजेक्ट की लागत ढाई से तीन हजार करोड़ तक बताई जा रही है। इनमें अधिकांश रनवे विस्तार, टैक्सी-वे सहित सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण काम शामिल हैं। देशभर में ऐसे कार्यों की संख्या सौ से ज्यादा है, जबकि राजस्थान व गुजरात के सात बड़े एयरबेस भी इसमें शामिल हैं। इन कामों में चार से पांच माह की देरी होने से सामरिक तैयारियों पर सीधा असर पड़ा है। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जोधपुर सचिव राजीव चौधरी का कहना है कि दिवाली से पहले अंतिम बार एमईएस ने बिल पास किए थे, इसके बाद से अब तक देशभर में बिल अटके हुए हैं। 


मजदूरों के समक्ष दिहाड़ी का संकट
पैसों के अभाव में श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा और काम चालू रखने के लिए बाजार से मटीरियल खरीदने में भी परेशानी आ रही है। एमईएस के कॉन्ट्रेक्टर की वित्तीय हालात खराब हो रही है। श्रमिकों के दो से तीन माह की दिहाड़ी रुकी हुई है। कई ठेकेदार अपनी जेब से पैसे चुका रहे हैं। वहीं काम जारी रखने के लिए सीमेंट, बजरी, सरिए व अन्य सामान खरीदने के पैसे नहीं हैं। श्रमिक भी बाहर से बुलाने के कारण उनके घरों में वित्तीय संकट हो गया है। दूसरी जगह से उन्हें काम नहीं मिल रहा है।


इन बड़े एयरबेस पर हुए काम ठप


बॉर्डर के पास फॉरवर्ड एयरबेस पर ज्यादा काम प्रभावित हुए हैं। इनमें लेह, चंडीगढ़, भुज में रन-वे विस्तार, टैक्सी-वे के काम शामिल हैं। इसके अलावा जोधपुर, फलोदी, जैसलमेर, उत्तरलाई, गांधीनगर, जामनगर, नलिया, नाल, सूरतगढ़ जैसे एयरबेस पर करीब चार सौ करोड़ के काम चल रहे हैं। यहां चल रहे कार्यों के बारे मे सामरिक दृष्टि व सुरक्षा कारणों खुलासा नहीं किया जा सकता है। काम ठप होने को लेकर एयरफोर्स के कमान स्तर पर बैठने वाले चीफ इंजीनियर्स से दिल्ली में इंजीनियर इन चीफ तक हाथ खड़े कर चुके हैं। कारण कि वित्त मंत्रालय से इस कामों को लेकर पैसे भी जारी नहीं किए जा रहे हैं। जबकि इन कार्यों के लिए पहले ही बजट में प्रावधान किया गया है।


रक्षा मंत्री को अवगत कराया, फिर भी समाधान नहीं
करोड़ों रुपए के बिल अटकने को लेकर एमईएस के अध्यक्ष अनिल कपूर ने चार दिन पहले वायुसेना प्रमुख को लेटर भेजा है। इसमें साफ बताया कि चार-पांच माह से फंड नहीं मिलने के कारण सभी काम रुके हुए हैं। इस बारे में वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिल चुके हैं। साथ ही रक्षा राज्य मंत्री से भी दो बार मिले हैं। फिर भी वित्त मंत्रालय से फंड जारी नहीं हो रहा है। एमएईएस ठेकेदारों ने विरोध प्रदर्शन करने और पीएमओ को ज्ञापन भेजने को कहा है।