दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जेएनयू हिंसा मामले की जांच तेजी से शुरू

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जेएनयू हिंसा मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी है। पुलिस को अब तक मोबाइल से बनाए गए 100 से ज्यादा वीडियो मिल चुके हैं। शाखा की टीमें मंगलवार को भी जेएनयू पहुंचीं और घायल छात्रों व गार्डों के बयान लेना शुरू कर दिया। 
 

इस दौरान दो दर्जन से ज्यादा विद्यार्थियों व गार्डों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस आरोपियों की पहचान के लिए सीन रीक्रिएशन कर रही है। इस बीच, कैंपस में मंगलवार को भी तनाव बना रहा। अंदर और गेटों पर भारी पुलिस बल तैनात था। मुख्य गेट पर स्थित गंगनाथ मार्ग मंगलवार को भी बंद रहा।

पुलिस ने हिंसा से संबंधित फोटो और वीडियो उपलब्ध कराने की सार्वजनिक अपील की थी। इसके बाद ये वीडियो मिले। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि जेएनयू की हिंसा में 51 विद्यार्थी घायल हुए हैं। इन सभी की एमएलसी बनी है। इनमें से 14 छात्र एबीवीपी और 25 वामपंथी संगठनों से जुड़े हैं। 11 छात्र किसी विचारधारा से जुड़े हुए नहीं हैं। 

अपराध शाखा की टीमों ने जेएनयू पहुंचकर कुछ साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि जेएनयू से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज नहीं मिली है। छात्रों ने सर्वर में तोड़फोड़ कर दी थी, जिस कारण सीसीटीवी कैमरे बंद थे।

पुलिस हिंसा से संबंधित व्हाट्स ऐप ग्रुप की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच के मुताबिक, हिंसा में दोनों पक्षों के लोग शामिल थे। यह जांच अभी चल रही है कि बाहरी नकाबपोश लोग जेएनयू के ही थे या बाहर से आए थे। पुलिस पीसीआर को सूचना देने वाले लोगों की मदद से आरोपियों की पहचान के प्रयास कर रही है।

पुलिस ने जेएनूय हिंसा मामले में आम लोगों से मांगी जानकारी

दिल्ली  पुलिस ने मंगलवार को एक सूचना जारी कर आम लोगों से जेएनयू हिंसा मामले से जुड़ी जानकारी, फोटो, वीडियो मांगे हैं। मामले की जांच में कई फोरेंसिक टीम भी जुटी हुई हैं। कैंपस में फोरेसिंक लैब के भौतिक, रसायन व जैव विभागों की कई टीमें जांच कर रही हैं। यह टीमें हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गये लोहे के सरिये, पत्थरों को जुटायेगी। इसके दिल्ली पुलिस ने कैंपस की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल के लिये फोरेसिंक लैब से  कंप्यूटर फोरेंसिक टीम भी भेजने का आग्रह किया है। 

सीसीटीवी सर्वर क्षतिग्रस्त होने से आरोपियों की पहचान में आ रही दिक्कत

सीसीटीवी सर्वर के क्षतिग्रस्त होने से जेएनयू हिंसा के आरोपियों की पहचान में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को दिक्कत आ रही है। सूत्रों के अनुसार सर्वर खराब होने से पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पा रही है। इस वजह से पुलिस व्हाट्स ऐप के समूहों में वायरल संदेशों के स्क्रीन शॉट व उनसे संबंधित मोबाइल नंबरों की पहचान कर रही है। इनमें से ज्यादातर नंबर अब बंद हैं। हिंसा के समय उन नंबरों की लोकेशन सीडीआर से ली जायेगी।