कांग्रेस का कैशबैक ऑफर, पानी बचाने पर अकाउंट में आएंगे हजारों रुपये

 

अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन बाजार वाली कंपनियां कैशबैक ऑफर देकर अपने उत्पाद सफलतापूर्वक बेचती रही हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्ता की एक प्रमुख दावेदार कांग्रेस पार्टी ने इसी तरह का कैशबैक ऑफर जनता के लिए पेश किया है।
 

योजना के मुताबिक दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनने पर पानी बचाने पर जनता को कैशबैक दिया जाएगा। एक लीटर पानी बचाने पर लोगों को 30 पैसे का कैशबैक ऑफर सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा। इस प्रकार एक हजार लीटर पानी बचाने पर 300 रुपये और दस हजार लीटर पानी बचाने पर 3,000 रुपये का कैशबैक दिया जाएगा। पार्टी ने इसे पानी जैसे अमूल्य संसाधन को भविष्य के लिए बचाने के लिए बहुत जरूरी बताया है।

इसके पहले दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार रहने पर कांग्रेस पार्टी ने वाटर सब्सिडी को बढ़ावा दिया था। इसके तहत अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग करने पर पानी के बिल में छूट दी गई थी।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने गुरुवार को कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने जनता को बीस हजार लीटर पानी फ्री में देने की योजना पेश की। यह उपभोग को बढ़ावा देने वाली योजना है। इससे पानी के दुरुपयोग को बढ़ावा मिलता है। जिस परिवार को 20 हजार लीटर पानी की आवश्यकता नहीं है, उसके हिस्से का पानी कालाबाजारी करने वालों को बेचा जा रहा है। इससे भविष्य में भी जल का संकट गहराएगा और दिल्ली वाटर वार की तरफ बढ़ेगी।

पानी बचाओ, पैसे कमाओ


सुभाष चोपड़ा ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार बनने पर 20 हजार लीटर पानी मुफ्त देने की योजना बंद नहीं की जाएगी, लेकिन पानी के उपभोग को घटाने के लिए पानी बचाओ, पैसे कमाओ जैसी योजना पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की योजना केपटाउन जैसे शहरों में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। यह मॉडल दिल्ली को भी पानी के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है और इसके लागू होने के बाद हरियाणा जैसे राज्य पर पानी की निर्भरता कम हो जाएगी।

वाटर वॉर की तरफ बढ़ रही दिल्ली


पानी के लिए दिल्ली के अनेक इलाकों में घोर संकट बना हुआ है। लोगों को पानी के टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन इसमें भी कई बार लोगों के बीच खूनी झगड़े तक हो जाते हैं। पानी के इसी संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में यह तल्ख टिप्पणी की थी कि दिल्ली वाटर वार की तरफ आगे बढ़ रही है। सरकार को पानी की समस्या के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।