केजरीवाल ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड, विरोधियों पर कसा तंज


दोपहर करीब 2.30 बजे, कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क। सूरज की लुकाछिपी के बीच मंच सज गया था। माइक, कैमरा भी तैयार था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुनने और उनके पांच साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड जानने लोग पहुंचने लगे थे। चुनावी चर्चाएं सर्द मौसम में सियासी गरमी पैदा कर रही थी।


केजरीवाल का इंतजार करता हर शख्स चुनावी पंडित बना बैठा था। हार-जीत पर सब अपनी गणित समझा रहे थे। इसी बीच हल्की बारिश होने लगी। लोग इधर-उधर पेड़ों की ओट लेने लगे। आयोजकों के चेहरे पर भी शिकन साफ नजर आने लगी थी। सेंट्रल पार्क में लोगों की बढ़ती चहलकदमी के बीच सियासी चर्चाएं अब बारिश की दिशा में मुड़ चली थी।

सलाहें आने लगी कि इस मौसम में केजरीवाल को खुले में नहीं, टाउन हॉल में कार्यक्रम करना था। बहरहाल, इंद्र देव थोड़ा डर पैदा कर वापस लौट गए और 3.30 बजे से दोबारा पार्क सजने लगा था।

मंच के ठीक सामने विधायक और उनसे पीछे उनके साथ आए समर्थक इंद्र धनुषाकार में बैठते गए। करीब 4.00 बजे मंच के सामने की पूरी जगह भर गई थी। आसमान में घने बादल होने से अंधेरा छाने लगा। इससे लाइटें भी जलानी पड़ी। उधर, मौसम से बेखबर आम लोग आपस की सियासी गपशप में व्यस्त रहे।

घड़ी की सुई करीब 4.40 बजा रही थी। तभी मंच के एक तरफ सुरक्षा कर्मियों की हरकत बढ़ गई। लोगों की निगाहें रेड कारपेट पर जा टिकीं। सुरक्षा के भारी तामझाम और सुरक्षाकर्मियों के घेरे में अरविंद केजरीवाल मंच पर पहुंचे। केजरीवाल को देखते ही लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। करीब पांच मिनट की जयकारे के बाद केजरीवाल ने अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया।

वह यह भी बताते रहे कि पांच सालों में इतना काम किया है कि सारे याद ही नहीं आ रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा पर बात करने के बाद भीड़ से वाई-फाई, सीसीटीवी, महिलाओं को फ्री बस यात्रा, तीर्थ यात्रा जैसी योजनाओं का शोर गूंज पड़ा।

करीब एक घंटे तक चली लोगों से बातचीत और विपक्षी पार्टियों की चुटकी लेने के बाद करीब 6:00 बजे केजरीवाल वापस लौट गए। जाते-जाते वह दिल्लीवालों से अपील करते गए कि दिल्ली के विकास की गाड़ी अब रफ्तार पकड़ चुकी है। 100 की चाल से चल रही गाड़ी को 200 तक पहुंचाना है।