सुप्रीम कोर्ट से दूरसंचार कंपनियों ने की खुली सुनवाई की मांग

 

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने समायोजित सकल आय (एजीआर) मामले में सुप्रीम कोर्ट से खुली सुनवाई की मांग की है।

इन कंपनियों को जल्द ही सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया जमा करना है। 24 अक्तूबर को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों का समय इन कंपनियों को बकाया जमा करने के लिए दिया था। 
 

बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा की अदालत में इन कंपनियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कंपनियों की तरफ से यह मांग रखी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वो मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे से बात करके फैसला लेंगे। 

कीमतों को लेकर कंपनियों में चल रही प्रतिस्पर्धा से इस उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। लगातार घाटे ने कई कंपनियों को इस क्षेत्र से बाहर कर दिया है। एक समय इस उद्योग में सात-आठ कंपनियां थीं, जो घटकर अब तीन हो गई हैं। चौथी सरकारी कंपनी है।  

सुप्रीम कोर्ट के नॉन-कोर राजस्व को भी कंपनियों के कुल समेकित राजस्व (एजीआर) में शामिल करने के आदेश से मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो एवं पुरानी दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और बढ़ गई है। हालांकि, टैरिफ बढ़ाने और नियामक के फ्लोर या न्यूनतम टैरिफ तय करने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेप का दोनों पक्षों से समर्थन मिलने के संकेत दिख रहे हैं।

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए फ्लोर प्राइज की वकालत करते हुए कहा कि हमने वॉइस कॉल से वीडियो कॉल की सुविधा में बिना ज्यादा खर्च बढ़ाए विस्तार किया। मौजूदा दबाव से निपटने के लिए ट्राई मार्च, 2020 से पहले जल्द-से-जल्द डाटा के लिए फ्लोर प्राइज लाए।

भारत में मोबाइल डाटा सबसे सस्ता


भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाला दूरसंचार बाजार है। इसके अलावा, यह सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बनकर उभरा है। 2019 में अमेरिका में एक जीबी मोबाइल डाटा की कीमत 12.37 डॉलर (करीब 880.73 रुपये) है। ब्रिटेन में इसके लिए 6.66 डॉलर (करीब 474.18 रुपये) खर्च करना पड़ता है। वहीं, भारत में यह कीमत महज 0.26 डॉलर (18.51 रुपये) है।