उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम में वेतन शीट में फर्जी नाम भरकर 5 करोड़ रुपये उड़ाये


उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम में वेतन शीट में फर्जी नाम भरकर 5 करोड़ रुपये उड़ाने का मामला प्रकाश में आया है। प्रदेश सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) से जांच कराने का आदेश दे दिया है। 


 

इतना ही नहीं वर्ष 2009 से रिकॉर्ड की जांच के लिए भी कहा है। इसलिए घपला राशि और भी ज्यादा होने की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस घपले में भ्रष्टाचारी कार्मिकों को कई प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिला हुआ था।

पिछले साल सितंबर में यह मामला वाराणसी में पकड़ में आया था। तब घपले की यह राशि महज 15.46 लाख रुपये बताई गई थी। घपला करने वाले कर्मचारियों ने बैंक को भेजी जाने वाली फील्ड कर्मचारियों की वेतन शीट में अपना व कई अन्य मिलने-जुलने वालों का नाम व बैंक खाता नंबर शामिल करके इसे अंजाम दिया। मामले में 20 सितंबर को ही निगम के वाराणसी स्थित कार्यालय के दो एकाउंट ऑफिसर, एक एकाउंट क्लर्क और एक कम्प्युटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।

इसके बाद वर्ष 2014 से 2019 की वेतन शीट की जांच कराए जाने पर घपला लगातार बढ़ता गया। पूर्व सैनिक कल्याण निगम के वाराणसी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में ही इस अवधि में बैंक को भेजी जाने वाली भुगतान शीट में गड़बड़ करके करीब 5 करोड़ रुपये का गबन मिला। इस तरह की गड़बड़ियां निगम के अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में भी किए जाने से इन्कार नहीं किया जा सकता। 

इसलिए उच्च स्तर से निगम प्रबंधन को सभी जिलों के रिकॉर्ड चेक करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। एक जनवरी 2009 से लेकर अभी तक की बैंक शीट की छानबीन की जाएगी। विभागीय जांच के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस प्रकरण की ईओडब्ल्यू से जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके लिए प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

परवान न चढ़ सकीं मामला रफा-दफा करने की कोशिशें
वेतन शीट में फर्जी नाम भरकर घपला करने वालों को कई प्रभावशाली लोगों के संरक्षण मिले होने की बात भी सामने आई है। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि घपला करने वालों के खिलाफ सितंबर में एफआईआर दर्ज कराई थी। अक्तूबर में एफआईआर को वापस लेने के आदेश जारी कर दिए गए। संबंधित कर्मचारियों से गबन की राशि वसूलकर विशेष भर्त्सनात्मक प्रतिकूल प्रविष्टि देने के लिए कहा गया। प्रकरण को देखने वाले शासन के कई अफसरों को हरियाणा-महाराष्ट्र की चुनाव ड्यूटी में भेजा गया था और मौका पाते ही कार्यवाही को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। इन अफसरों ने चुनाव ड्यूटी से लौटते ही इस मामले को उच्चस्तर पर साझा किया। इसके बाद एफआईआर वापस लेने सबंधी 14 अक्तूबर का आदेश रद किया गया।

वेतन शीट में घपला करके गबन करने का यह गंभीर मामला है। प्रथमदृष्टया लग रहा है कि यह गड़बड़ लंबे समय से की जा रही थी। हमें मामले की ईओडब्ल्यू से जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिले हैं। गृह विभाग को इस संबंध में पत्र भेजा जा रहा है।
-धीरज कुमार, निदेशक, उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड


कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड में 15.46 लाख रुपये के गबन में वांछित कंप्यूटर ऑपरेटर रवींद्र कुमार को सोमवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। गोरखपुर के चौरीचौरा थाना के सतहवां पश्चिमी स्थित घर से दबोचे गए रवींद्र पर 10 हजार रुपये इनाम था। तीन अन्य कर्मचारियों लेखा लिपिक देवव्रत राय, लेखाकार महेंद्र सिंह और लेखाकार संजय कुमार वर्मा की पुलिस को तलाश है। इन तीनों पर भी 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है। मकबूल आलम रोड स्थित उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम कार्यालय में वेतन शीट में फर्जी नाम भरकर 15 लाख 46 हजार 222 रुपये के गबन का मामला बीते साल सितंबर में सामने आया था।