केजरीवाल नाम के इस तूफान में भी भाजपा के आठ नेताओं ने अपना झंडा फहराए रखा


आम आदमी पार्टी की आंधी में भाजपा और कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता चुनाव हार गए। लेकिन अरविंद केजरीवाल नाम के इस तूफान में भी भाजपा के आठ नेताओं ने अपना झंडा फहराए रखा और पार्टी की साख बचाने की पुरजोर  कोशिश की। इनमें पिछली विधानसभा में भी विधायक रहे ओम प्रकाश शर्मा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे विजेन्दर गुप्ता शामिल हैं। इनमें कई नेताओं की पृष्ठभूमि आरएसएस और एबीवीपी कार्यकर्ता की रही है।


भाजपा उम्मीदवार विजेन्दर गुप्ता ने रोहिणी विधानसभा क्षेत्र से अपनी सीट बरकरार रखने में सफलता हासिल की है। इस बार उन्हें 62174 वोट मिला है। उन्होंने 12648 वोटों के अंतर से नजदीकी आप उम्मीदवार को हराया है। विजेन्दर गुप्ता इस समय दिल्ली प्रदेश भाजपा के बड़े नेता माने जाते हैं। दिल्ली के व्यापारी वर्ग पर भाजपा नेता विजय गोयल के अलावा सबसे अच्छी पकड़ विजेन्दर गुप्ता की ही बताई जाती है। भाजपा के केंद्रीय नेताओं के बीच उनकी अच्छी साख उनकी ताकत मानी गई है।  

विश्वास नगर से भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा लगातार दूसरी बार अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे हैं। उन्हें कुल 65,830 वोट मिले हैं। उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी आप प्रत्याशी दीपक सिंगला को 16,457 वोटों से शिकस्त दी है। ओम प्रकाश शर्मा पेशे से हलवाई हैं। राजनीति में वे भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली के आदमी माने जाते थे। भाजपा की अंदरूनी राजनीति में वे मनोज तिवारी के विरोधी खेमे के ताकतवर नेता माने जाते हैं। 

करावल नगर की विधानसभा सीट पर भाजपा के पुराने दिग्गज मोहन सिंह बिष्ट को शानदार सफलता मिली है। उन्हें कुल 96721 वोट मिले हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी दुर्गेश पाठक को 8223 वोटों से हराया है। उत्तराखंड के प्रवासी मजदूरों में बेहद खास छवि के नेता मोहन सिंह बिष्ट यहां से चार बार पूर्व में विधानसभा पहुंच चुके हैं। इस बार उन्होंने पांचवीं बार सफलता प्राप्त किया है। वे आरएसएस के जमीनी कार्यकर्ताओं में गिने जाते थे। संगठन के ही निर्देश पर उन्होंने भाजपा की सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका तलाशी थी। 

घोंडा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर अजय महावर 81797 वोट पाकर जीत हासिल कर चुके हैं। उन्होंने अपने नजदीकी प्रत्याशी को 28370 वोटों से हराया है। अजय महावर ने एबीवीपी कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। इस समय भी वे मनोज तिवारी की टीम में उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिले (भाजपा का सांगठनिक जिला) के अध्यक्ष हैं। अपनी सरल छवि और संगठन पर मजबूत पकड़ उनकी बड़ी ताकत मानी जाती है। 

रोहतास नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर जीते जितेंदर महाजन ने कुल 73873 वोट हासिल किया है। उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी को 13241 वोटों के अंतर से हराया है। जितेंदर महाजन भी आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता रहे हैं और स्वदेशी जागरण मंच की चौपाल चलाते रहे हैं। उनकी कार्यकर्ताओं पर जमीनी पकड़ उन्हें अपने क्षेत्र में निर्विवाद बना देती है। 

चुनाव से कुछ समय पहले आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा में आने वाले अनिल बाजपेयी ने गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्हें कुल 48824 वोट मिले हैं और उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली को 6079 वोटों से हराया है। आम आदमी पार्टी से भी पहले वे कांग्रेस में रहे थे और लवली के करीबी माने जाते थे। 

भाजपा के टिकट पर अभय वर्मा ने सबसे कम वोटों के अंतर (880) से जीत हासिल की है। लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने आम आदमी पार्टी के वर्तमान विधायक नितिन त्यागी को हराया है। अभय वर्मा पेशे से वकील हैं और इसके पहले 2013 में भी अपनी किस्मत आजमा चुके थे लेकिन उस चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार भी उनकी टिकट की दावेदारी भाजपा दिल्ली के संगठन महामंत्री सिद्धार्थन की कृपा से मिला बताया जाता है। पूर्वांचली चेहरा होने और भाजपा के राष्ट्रवाद ने उन्हें जिताने में अहम भूमिका निभाई है। 

बदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह बिधूड़ी को कुल 90082 मत प्राप्त हुए हैं। उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी को लगभग तीन हजार वोटों से हराया है। उन्हें भाजपा के एक सांसद का करीबी माना जाता है। स्थानीय गुजर वोटों पर पकड़ उनकी बड़ी ताकत बताई जाती है।