केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक अहम बदलाव ,अब कर्ज लेने वाले किसानों के लिए बीमा कराना जरूरी नहीं


किसानों के लिए आज एक राहत की ख़बर आई. केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक अहम बदलाव करने पर मुहर लगा दी. सरकार ने योजना को अब स्वैच्छिक बनाने का फैसला किया है. अब ये किसान पर निर्भर करेगा कि वो बीमा योजना के दायरे में आना चाहता है या नहीं. 24 दिसंबर को एबीपी न्यूज़ ने सरकार के इस प्रस्तावित कदम की जानकारी दी थी.


 


इस साल ख़रीफ़ सीज़न से बदलाव
कैबिनेट का फैसला इस साल अप्रैल-मई में शुरू होने वाली खरीफ फसल सीजन से प्रभावी हो जाएगा. अभी तक के नियम के मुताबिक अगर कोई किसान, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अपने फसलों के लिए कोई लोन लेता है तो उसके साथ उसे फसलों का बीमा करवाना अनिवार्य होता है. लेकिन, इस नियम को लेकर किसानों की ओर से पहले से ही शिकायतें आती रहती हैं.


 


उनका कहना रहा है कि बैंक और बीमा कंपनियां उनको बिना बताए बीमा की रकम ले लेती हैं जबकि वो बीमा करवाना नहीं चाहते. इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के किसान शामिल हैं. देशभर में कुल 58 फ़ीसदी ऐसे किसान हैं जो लोन लेकर खेती करते हैं जबकि 42 फीसदी लोन नहीं लेते हैं. मोदी सरकार ने इसी शिकायत को दूर करने की पहल की है. लोन नहीं लेने वाले किसानों के लिए योजना पहले से ही स्वैच्छिक या वैकल्पिक है .


 


3 साल के लिए नियुक्त होंगी बीमा कंपनियां
कैबिनेट ने इस योजना में कई अन्य बदलावों को भी मंजूरी दी है . एक अहम फैसले में ये तय किया गया है कि अब कोई भी राज्य सरकार बीमा कंपनी से तीन साल से कम का करार नहीं कर सकेंगी. अभी के नियम के मुताबिक बीमा कंपनियों के साथ 3 साल तक का करार हो सकता है. इसका असर होता है कि बीमा कंपनियां अपना ढ़ांचा ठीक से खड़ा नहीं करतीं और किसानों को मुआवज़ा मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है . इसके अलावा अब उत्तर पूर्वी राज्यों में योजना के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा 90:10 के अनुपात में होगा जो अभी तक 50 : 50 होता था.


 


प्रधानमंत्री का था निर्देश
सूत्रों के मुताबिक देश भर के किसानों से मिल रही शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दिलचस्पी लेते हुए इन्हें दूर करने का निर्देश दिया था. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्रीसमूह का गठन किया गया था जिसमें गृह मंत्री अमित शाह , सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा अन्य मंत्री भी शामिल थे.


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फसल बीमा योजना के तहत राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के किसान सबसे ज्यादा बीमा करवाते हैं क्योंकि इन इलाकों में खराब मौसम से फसलों के बर्बाद होने की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं. आंकड़ों के मुताबिक सरकार अबतक किसानों को फसल बीमा के तहत 60000 करोड़ रुपए का मुआवजा दे चुकी है जबकि किसानों ने अबतक 13000 करोड़ रुपए की रकम जमा की है.