भाजपा को ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्णय से फायदा तो राहुल गांधी और कांग्रेस को अफसोस

राजनीति में सब कुछ दिन की बात है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम के कई सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्णय से हैरान हैं। राहुल गांधी का बयान गहरी चोट करके सिंधिया को स्वार्थ से भरा बगी (धोखेबाज) करार दे रहा है।
 

सुष्मिता देव के मुंह से सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर जाने के बाद शब्द नहीं फूट रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सिंधिया के पार्टी छोड़ने पर अफसोस जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि ज्योतिरादित्य कांग्रेस पार्टी छोड़ देंगे।

राहुल ने कहा... कभी भी हमारे घर आ जा सकते थे
राहुल गांधी से बुधवार सुबह ज्योतिरादित्य के कांग्रेस छोड़ने पर सवाल पूछा गया तो वह टाल गए। बिना कोई उत्तर दिए चले गए। शाम पांच बजे तक राहुल गांधी से नहीं रहा गया। तब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपाई बन चुके थे। हालांकि ज्योतिरादित्य ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी की दशा और दिशा को लेकर हमला बोला, लेकिन सवाल का जवाब देने से बचे।

मीडिया से मुखातिब नहीं हुए। शाम को राहुल गांधी का सधा हुआ बयान आया। इस बयान में राहुल गांधी का दुख, अफसोस और सिंधिया के व्यवहार पर आश्चर्य साफ नजर आया। राहुल ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से उनके संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। वे कभी भी हमारे घर आ जा सकते थे। राहुल गांधी के बयान से साफ है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कोई आम नेता नहीं थे।

बल्कि वह घर के भीतर संबंध रखने वाले घरेलू मित्रों में थे और अब छोड़कर चले गए। कांग्रेस पार्टी की एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना है कि ज्योतिरादित्य जो चाह रहे थे उन्हें लगभग सब मिल रहा था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इसमें कोई एतराज नहीं था, लेकिन उनकी एक दो मांग ना मानने वाली ही थीं। सूत्र का कहना था कि कुछ समय बाद जब ठंडे दिमाग से सोचेंगे तब उन्हें समझ में आएगा। वरिष्ठ नेता का कहना है कि जो हुआ है उसमें उनका अहंकार भी आड़े आया है।


दिग्विजय सिंह की छवि पर फिर पहुंची चोट



कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्वजय सिंह की छवि पर फिर बड़ी चोट पहुंची। दिसंबर 2018 में मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के समय भी दिग्विजय सिंह की छवि सिंधिया के मामले में खलनायक की बनी थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के मुख्यालय में नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह के षडयंत्र और कमलनाथ के ऊपर उनके नियंत्रण के आगे ज्योतिरादित्य सिंधिया बेबस हो गए।

कांग्रेस पार्टी के मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुझे यह मान लेने में कोई संकोच नहीं है। यहां सिंधिया सही हैं कि उनके इस्तीफे की जमीन कांग्रेस के ही नेताओं ने तैयार की। लेकिन इसके साथ ही यह भी तय है कि सिंधिया का भी इसमें दोष है। वह अपने अहंकार में वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे थे।




भाजपा की बल्ले-बल्ले


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जब प्रेसवार्ता में सिंधिया के पार्टी ज्वाइन करने की घोषणा कर रहे थे तो मध्यप्रदेश से ही आने वाले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्र बुद्धे का मुदित मन काफी कुछ इशारा कर रहा था। प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के चेहरे की खुशी और भाजपा प्रवक्ता जफर इस्लाम के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी।

भाजपा के मुख्यालय में साफ लग रहा था कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी का बहुत बड़ा विकेट गिरा दिया। पार्टी महासचिव अनिल जैन भी सिंधिया के ज्वाइन करने की अहमियत ढंग से समझ रहे हैं। भाजपा के नेताओं का मानना है कि मध्यप्रदेश में पार्टी की सरकार बनना तय है। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल संभाग की सीटों पर अब हर चुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों के जीत की गारंटी हो गई है।



मामला मध्यप्रदेश का ही नहीं है...



पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि मामला केवल मध्यप्रदेश का ही नहीं है, इसका असर कांग्रेस की देशव्यापी राजनीति पर पड़ेगा। सूत्रों का अनुमान है कि इससे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक अभियानों को भी झटका लगेगा।

सिंधिया के राज्यसभा में आने की संभावना है। बताते हैं कि सिंधिया संसद में भी कांग्रेस पार्टी की परेशानी बढ़ाएंगे। भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि अभी वह पार्टी में आए हैं। अब पार्टी उनका बड़े पैमाने पर उपयोग करेगी।