भारत में कोरोना वायरस के मामले क्या इन तीन कारणों से कम हैं

भारत में अब तक कोरोना वायरस के 152 मामले सामने आए हैं, वही इस जानलेवा वायरस से अब तक तीन लोगों की मौत हुई है। लेकिन लोगों के बीच इस बात सुगबुगाहट है कि भारत जैसी इतनी आबादी में संक्रमितों की संख्या इतनी कम कैसे हैं। इस बात का जवाब इस प्रकार मिल सकता है कि अभी तक भारत में कितने लोगों की कोरोना को लेकर जांच की गई है। जहां दक्षिण कोरिया में कोरोना की जांच हर 10 लाख की आबादी में 4,831 लोगों की हुई, चीन में यह आकंड़ा हर 10 लाख पर 2,820 लोगों का है, इटली में दस लाख पर 1,420 लोगों की जांच की गई है। वहीं, भारत में जांच का यह अनुपात बहुत ही कम है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 17 जनवरी तक भारत में अब तक 7,919 लोगों की ही जांच की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस कारण भारत में अब तक 152 मामले ही सामने आए हैं, जबकि हकीकत यह है कि देश के कई हिस्सों में यह वायरस लोगों के बीच पहुंच रहा है। यह वायरस तेजी से एक-दूसरे के माध्यम से देश के नागरिकों के बीच अपने पांव पसार रहा है, इसलिए सरकार को सही आंकड़ों का पता लगाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने की जरूरत है। जितने ज्यादा लोगों की जांच की जाएगी, उतना ही इस वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। फिलहाल अगर आपको कोरोना के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आप सीधे अस्पताल जाकर इसकी जांच नहीं करवा सकते हैं। आपको सरकार द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन नंबर पर फोन करना होता है। जब आप हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करेंगे तो वे लोग आपसे कई तरह के सवाल करेंगे। जिनमें आप से पूछा जाएगा कि क्या आपने विदेश यात्रा की, विदेश यात्रा करके लौटे व्यक्ति के साथ समय बिताया या फिर आप इस बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति से मिले थे? अगर आप इस सवाल का हां में उत्तर देंगे तो आपको अस्पताल भेजा जाएगा, जहां आपकी जांच की जाएगी। वहीं, अगर आप का जवाब नहीं होता है तो आपको जांच के लिए नहीं भेजा जाएगा।  दरअसल, यह सारी जांच प्रक्रिया आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप की जा रही है। आईसीएमआर गाइडलाइन में कहा गया है कि बीमारी मुख्य रूप से प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले व्यक्तियों या पॉजीटिव मामलों के करीबी संपर्क में होती है, इसलिए सभी व्यक्तियों का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए।स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वायरस की जांच करने की सरकार द्वारा अपनाई जा रही इस प्रणाली से चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आबादी एक अरब 30 करोड़ हैं और इतनी ज्यादा आबादी वाले देश में जांच बहुत कम किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत का यह तरीका जांच को सीमित करने वाला है। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया, हांग कांग और सिंगापुर में इसके उलट उदार तरीके का प्रयोग किया जा रहा है, जहां वायरस के लक्षण वाले हर व्यक्ति की सरकारी और निजी अस्पतालों में जांच की जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि अगर भारत दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाए तो मामलों की संख्या 5000 तक पहुंच सकती है।