एक लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी कलेक्शन

2019 के दिसंबर माह में जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। इसमें साल दर साल के आधार पर नौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर में जीएसटी संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा। यह लगातार दूसरी बार है जब जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार गया है। 
 

नवंबर माह में यह छह फीसदी बढ़कर 1,03,492 लाख करोड़ रुपये रहा था। फेस्टिव सीजन और कानून का सख्त तरीके से पालन करने के चलते ऐसा हुआ। दिसंबर माह में सीजीएसटी संग्रह 19,962 करोड़ रुपये रहा, जबकि एसजीएसटी संग्रह 26,792 करोड़ रुपये, आईजीएसटी संग्रह 48,099 करोड़ रुपये रहा है। वहीं सेस से संग्रह 8,331 करोड़ रुपये रहा है। 

सितंबर और अक्तूबर माह में जीएसटी संग्रह क्रमशः 2.7 फीसदी व 5.3 फीसदी गिर गया था। 

नवंबर में इतना हुआ था जीएसटी संग्रह


नवंबर महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत हुआ 1.03 लाख करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हुआ। इसमें केंद्रीय जीएसटी का हिस्सा 19,592 करोड़ रुपये जबकि राज्य जीएसटी 27,144 करोड़ रुपये हिस्सा रहा। एकीकृत माल और सेवा कर के रूप में 49,028 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उपकर के रूप में 7,727 करोड़ रुपये मिले।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस बार नवंबर में केंद्रीय जीएसटी से वसूली 19,592 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी से 27,144 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी से 49,028 करोड़ रुपये और जीएसटी उपकर से वसूली 7,727 करोड़ रुपये रही। एकीकृत जीएसटी में से 20,948 करोड़ रुपये आयात से वसूल हुए। इसी तरह उपकर की वसूली में 869 करोड़ रुपये आयातित माल पर उपकर से प्राप्त हुए। 

जीएसटी वसूली बढ़ने से राजकोषीय स्तर पर सरकार को मिलेगा सहारा


तीन महीने के अंतराल के बाद नवंबर में एक बार फिर जीएसटी वसूली 1 लाख करोड़ रुपये के पार जाने से सरकार को राजकोषीय स्तर पर राहत मिली थी। नवंबर में ही देश का राजकोषीय घाटा बजट में तय लक्ष्य का 102 फीसदी पहुंच चुका था। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्व में बढ़ोतरी होने पर सरकार के पास खर्च के लिए ज्यादा पैसे होंगे, जो विकास को गति देने में मददगार होंगे।

गौरतलब है कि त्योहारी सीजन की वजह से नवंबर में 1.02 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली हुई, जो जुलाई के बाद पहली बार 1 लाख करोड़ के लक्ष्य के पार गई है। डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मणि का कहना है कि जीएसटी वसूली में इजाफा बाजार धारणा में सुधार को दर्शाता है। अगर यह बढ़ोतरी आने वाले महीनों में भी जारी रहती है, तो इससे राजकोषीय घाटे पर काबू पाने में सरकार को काफी मदद मिलेगी।

घाटे नहीं खर्च पर ध्यान दे सरकार : सेन


भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन का कहना है कि सरकार को अभी राजकोषीय घाटे पर ध्यान देने के बजाए खर्च और खपत बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। सेन ने कहा कि असली समस्या खपत के मोर्चे पर है, जिसे बढ़ाने के लिए लोगों के हाथ में पैसे चाहिए। सरकार को आरबीआई से कहना चाहिए कि वह बॉन्ड की खरीदारी करे, ताकि नए बॉन्ड जारी किए जा सकें। यह काम 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के साथ पूरा नहीं होगा, बल्कि इसकी समीक्षा करनी पड़ेगी