झारखंड में भाजपा के आधे से अधिक जिला अध्यक्ष हटाए जाएंगे





रांची. विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार का ठीकरा जिलाध्यक्षों पर फूटेगा। उन्हें हटाया जाएगा। प्रदेश भाजपा के एक वरीय नेता ने संकेत दिया है कि लगभग आधे से अधिक जिलाध्यक्ष हटाए जानेवाले हैं।



पार्टी सूत्रों मुताबिक, खराब परफॉरमेंस वाले अध्यक्षों की सूची बन रही है। इस बार कोल्हान में पार्टी को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा है। यहां के अधिकतर अध्यक्षों का जाना तय बताया जा रहा है। जिस जिले के अध्यक्ष को हटाया जाएगा, वहां इस बार नए अध्यक्ष के लिए चुनाव नहीं, बल्कि मनोनयन होगा। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष को मनोनीत किया जाएगा। फिर, नए प्रदेश अध्यक्ष जिलाध्यक्षों का मनोनयन करेंगे।


रिजल्ट आने के बाद लक्ष्मण गिलुवा दे चुके हैं इस्तीफा
हार की जिम्मेवारी लेते हुए वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा पहले ही त्यागपत्र दे चुके हैं। हालांकि, अब तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। होल्ड पर रखा गया है। औपचारिक रूप से प्रदेश के पार्टी नेता इस बारे में कुछ भी बताने से बच रहे हैं, पर अनौपचारिक रूप से यह स्वीकार रहे हैं कि विधानसभा में नेता पद की नियुक्ति को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण मामला उलझा हुआ है। पार्टी अध्यक्ष व विधायक दल के नेता में से एक आदिवासी तो दूसरा गैर आदिवासी नियुक्त होगा। दोनों नियुक्तियां जनवरी के अंत तक हो सकती है।


सांसदों की भूमिका पर भी प्रश्न
प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रभारी रहे ओमप्रकाश माथुर और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय नेतृत्व को विधानसभा चुनाव के बारे में पिछले दिनों रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया था। रिपोर्ट में किसी सांसद विशेष का उल्लेख नहीं करने के बाद भी यह कहा गया है कि जिस प्रकार संसदीय चुनाव में विधायकों ने क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रमों से तालमेल बिठाते हुए मेहनत की थी, उस तरह का प्रदर्शन सांसदों ने नहीं किया।


आदिवासी युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की योजना 


राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 28 विधानसभा सीटों में से इस बार 26 पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है। इसलिए, राष्ट्रीय नेतृत्व ने झारखंड के युवा एसटी लीडरों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। ऐसे में इस बार प्रदेश कार्यसमिति में सिर्फ कोरम के लिए नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण पदों पर एसटी लीडरों को रखे जाने की योजना बन रही है। एसटी मोर्चा को मजबूत बनाने के साथ-साथ युवा, किसान और महिला मोर्चा में भी एसटी समुदाय को ज्यादा हिस्सेदारी मिलेगी। एसटी समाज में एसटी लीडर ही काम करेंगे। इसके लिए पिछले चुनाव में कम अंतराल से चुनाव हारने वाले एसटी नेताओं को मुख्यधारा की राजनीति में लाया जाएगा।