इन विकल्पों पर करदाता नए स्लैब में भी ले सकते हैं छूट का लाभ

सरकार ने विभिन्न आय वर्ग के करदाताओं को कम दर वाले स्लैब का तोहफा देेने के साथ करीब 70 तरह की टैक्स छूट सुविधाओं को खत्म कर दिया। इसमें बीमा, पीपीएफ, होम लोन, एनपीएस सहित आय के कई स्रोत शामिल हैं। बावजूद इसके आय के कई विकल्पों पर अभी करदाता छूट का दावा पेश कर सकते हैं।
 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय बताया था कि नया स्लैब अपनाने वाले को मौजूदा समय मेें दी जा रही 70 फीसदी छूट का लाभ नहीं मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि फाइनेंस बिल 2020-21 में कई अवसर अब भी उपलब्ध हैं, जिन पर टैक्स छूट की सुविधा खत्म नहीं की गई है।


डाकघर के बचत खाते पर



आयकर की धारा 10 (15आई) के तहत डाकघर के बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज की एक निश्चित राशि कर छूट के दायरे में आती है। इसके तहत व्यक्तिगत बचत खाते पर सालाना 3,500 रुपये का ब्याज और ज्वाइंट खाते पर 7,000 रुपये तक का ब्याज करमुक्त रहेगा।

नौकरीपेशा की ग्रेच्युटी

किसी वेतनभोगी करदाता को नियोक्ता की ओर से मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि अब भी करमुक्त होती है। आयकर कानून के तहत गैर सरकारी कर्मचारी की 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी करमुक्त मानी जाएगी, जबकि सरकारी कर्मचारी को ग्रेच्युटी के रूप में मिली पूरी राशि पर कर नहीं लगेगा। वहीं, कर्मचारी (सरकारी, गैर सरकारी) की असमय मौत की स्थिति में भी ग्रेच्युटी की पूरी राशि करमुक्त रहेगी।




जीवन बीमा की परिपक्वता राशि



आयकर की धारा 10 (10डी) के तहत जीवन बीमा की परिपक्वता पर कंपनियों की ओर से मिलने वाली पूरी राशि को नए टैक्स स्लैब में भी करमुक्त रखा गया है। हालांकि, सरकार ने 80सी के तहत अब जीवन बीमा प्रीमियम की राशि पर मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त कर दी है।

ईपीएफ-एनपीएस में नियोक्ता की भुगतान राशि

सरकार ने 2020-21 के बजट प्रस्ताव में नियोक्ता की ओर से वेतनभोगी के ईपीएफ और एनपीएस में किए जाने वाले योगदान को कर के दायरे से बाहर रखा है। हालांकि, इसकी सकल राशि किसी वित्त वर्ष में 7.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ऊपर की राशि पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा।