कोशिश कर रही कंपनियां आंख में धूल झोंकने की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये का स्वमूल्यांकन करने के लिए केंद्र सरकार और दूरसंचार कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही साफ किया कि एजीआर बकाये का पुन:आकलन नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, एजीआर बकाया राशि के मामले में हमारा फैसला अंतिम है और इसका पूरी तरह पालन करना ही होगा।जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दूरसंचार कंपनियों को बकाया राशि का भुगतान 20 साल में करने की अनुमति देने के केंद्र के आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा, इस आवेदन पर दो हफ्ते बाद विचार होगा। पीठ ने दो टूक कहा, अब बकाया रकम का दोबारा मूल्यांकन नहीं होगा और पहले दिए आदेश के मुताबिक ही कंपनियों को भुगतान करना होगा।पुन:मूल्यांकन का कोई भी प्रयास कोर्ट से छल है और कोर्ट की अवमानना है। दूरसंचार विभाग को निर्णय वापस लेना होगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा, बिना कोर्ट की अनुमति के कंपनियों को स्व:मूल्यांकन (बकाया राशि के सेल्फ असेसमेंट) की इजाजत कैसे दी गई। कोर्ट ने कहा, यह करदाताओं का पैसा है, जिसका भुगतान 20 साल से लटका हुआ है।पीठ ने कहा, दूरसंचार कंपनियां आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही हैं। इसे हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे। एजीआर के स्वमूल्यांकन की अनुमति देकर हम कोर्ट के अधिकारों का अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दे सकते। कंपनियों को स्वत: आकलन की इजाजत देना फैसले पर पुनर्विचार करना नहीं, बल्कि मामले को फिर से खोलना है।पीठ ने कहा, क्या हम बेवकूफ हैं? क्या दूरसंचार विभाग के अधिकारी खुद को हमसे ऊपर समझते हैं? सब हमें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया के जरिए खबरें प्लांट कराई जा रही हैं। अखबारों में कंपनियों के पक्ष में लेख आ रहे हैं। यह हो क्या रहा है? इसके लिए दूरसंचार कंपनियों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। भविष्य में ऐसे किसी लेख के लिए उन्हें कोर्ट की अवमानना का दोषी माना जाएगा। जिन अधिकारियों ने बकाये का आकलन करने को कहा था, उन्हें बख्शेंगे नहीं।गत वर्ष 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को 90 दिन में बकाया 92,000 करोड़ रुपये बतौर एजीआर जमा कराने को कहा था। एजीआर और ब्याज मिलकर रकम अब 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है। गत 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था।